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Published by Himarticles

अक्ल की दाद
एक दिन बाद्शाह अकबर ने कागज़
पर पैंसिल से एक लम्बी लकीर खींची और बीरबल को बुलाकर कहा- बीरबल न तो यह लकीर घटाई जाए और न ही मिटाई जाए लेकिन छोटी हो जाए।
बीरबल ने फौरन उस लकीर के नीचे एक दुसरी लकीर पैंसिल से बडी खीच दी .....आगे
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दुनियां के सबसे सुन्दर बच्चे
एक बार एक मादा उल्लू के अहसान का बदला चुकाने के लिए एक गरुड ने उससे वायदा किया कि वह उस उल्लू के बच्चों को
कभी नुकसान नही पहुँचाएगा । पर तुम मेरे बच्चों को कैसे पहचानोगे? मादा उल्लू ने बडी उत्सुकता से पूछा, यह कैसे पता चले
कि तुम उन्हे किसी अन्य चिडिया के बच्चे नही समझ लोगे?
ऐसा करो कि तुम खुद ही बता दो वे कैसे दिखते हैं, गरुड ने पूछा?
वास्तव मे वे किसी अन्य चिडिया के बच्चे जैसे नही है, मादा उल्लू ने गर्व से सीना फुला कर कहा। वे नरम है,
गुदगुदे हैं और दुनियां के सब से सुन्दर बच्चे हैं। इतने सुन्दर बच्चे तुम ने कभी नही देखे होगे।
एक शाम गरुड को एक ऐसा घोंसला मिला जिसमे चिडिया के कुछ बच्चे चिल्ला रहे थे। उन के लाल मुँह खुले हुए थे। वह
रुका और थोडी देर विचार करने के बाद वह खुद से बोला " ज़ाहिर है यह तो उस उल्लू के बच्चे नही हो सकते क्योकि मादा उल्लू
ने तो कहा था कि उस के बच्चे बेहद खुबसुरत हैं और यह बच्चे तो बहुत बद्सूरत है" उस के बाद बिना कुछ सोचे वह उन बच्चों
पर टूट पडा और सब को खा गया। वहां सबकुछ खून सने पंख पडे थे।
गरुड अपना वादा कैसे भूल गया? वह रोते-रोते बोली। मैने तो उसे बता दिया था कि मेरे बच्चे सब से सुन्दर है।
सबक; हर माँ यही समझती है कि
उस के बच्चे सब से सुन्दर व अच्छे हैं ।
  
रीछ फिर धोखा खा गया
भारी कर्ज़ के बोज के नीचे दबा एक दरिद्र
आदमे, लेनदेन के रोज़ रोज़ के गालियों और धक्के मुक्कों से तंग आ कर जंगल मे भाग गया। वह जंगल मे एक पेड के नीचे लेटा हुआ, अपनी
इस नरकीय ज़िंदगी के बारे मे सोचते हुए अपने आप मे इतना खोया हुआ था कि उसे ध्यान ही नही रहा कि कब एक रीछ उसके सिर पर पहुँच गया।
अचानक सिर पर आए खतरे को भांप कर उस ने तुरन्त अपनी सांस रोक ली। जब रीछ ने देखा कि वह आदमी सांस नही ली रहा है, तो उसने अपने
नाखूनो व दातों से उसके शरीर को बुरी तरह नोचना शुरु कर दिया किया क्योकि उस रीछ ने सुन रखा था कि किसी जमाने मे एक आदमी
ने सांस रोक लेने से कोई रीछ धोखा खा गया था। बुरी तरह चमडी उतर जाने के बाद भी वह ट्स से मस नही हुआ तो रीछ, उसे वास्तव मे मरा
हुआ समझ कर वहां से चला गया । कुछ दुर जाने के बाद न जाने रीछ के मन मे क्या आया, उस ने पिछे मुड कर देखा तो वह हैरान रह
गया। वह आदमी उठ कर पेड पर चढ रहा था ।
रीछ तुरन्त पेड के पास लौट आया और पेड पर चढे उस आदमी से
वोला, हे मानव! जरा सा कांटा लगने पर, हाड मांस का बना हर प्राणी तिलमिला उठता है। मैने तो तेरी सारी चमडी उधेड दी पर तुझे दर्द
क्यों नही हुआ?
हे जंगल मे निवास करने वाले रीछ, तू क्या जाने? मैने इस
सभ्य समाज मे, गरीबी व भुखमरी का जो दर्द सहन किया है, साहूकारो की जो प्रताडना सहन की है, उसके मुकाबले तो यह दर्द कुछ भी नही ।
वह अपने धावो की ओर इशारा करते हुए बोला। जिसमे से उस समय टप टप लहू बह रहा था ।
  
प्रेम दो-प्रेम लो
एक अध्यापक के कौतुहल वश एक परिक्षण किया। उन्होने विधार्थियो से कहा: "आप सब उन सहपाठियों के नाम लिख दें जिन्हे
आप नापसंद करते हैं, जो आप को अच्छे नही लगते। फिर पेपर बंद कर मुझे दे दें। मै यह पेपर किसी को नही दिखाऊंगा। सिर्फ मै ही उन
नामों को देखूंगा।"
सारे कागज़ अध्यापक के पास आ गए। उन्होने उनका निरिक्षण किया। सभी छात्र छात्राओ ने अपने नापसंद के कई नाम लिखे हुए
थे अपने हस्तक्षर सहित । सिर्फ एक ही छात्र था जिस ने लिखा थ कि:-
" मुझे कोई भी नापसंद नही है। सभी मुझे अच्छे लगते है, सभी मेरे मित्र हैं"
अध्यापक को यह जानकर आश्चर्य-मिश्रित प्रसन्नता हुई कि सभी छात्र छात्राओं के
नाम एक दुसरे की पसंद नापसंद की सूची मे आ गये थे, परन्तु उस छात्र का नाम किसी ने भी नही लिखा था, जिसने सब के प्रति
प्रेम व मित्रता का भाव रखा था।
कमलेश कुमार चम्वाल

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