जब भी तेरी
यादों को आसपास पाता हूँ,
खुद को हद दर्जा तक उदास पाता हूँ,
तुझे तो मिल गई खुशियां जहां भर की,
मै अब भी दिल मे वही प्यास पाता हूँ.
अपने बेगाने हुए दुशमन जमाना हो गया,
ज़रा सी बात पर रुसवा फसाना हो गया,
मुझे सज़ा के तौर पर मिला काटों का बिस्तर,
उसका अंगन फूलो का अशियाना हो गया.
निभाया वादा हमने शिकवा न किया,
दर्द सहे मगर तुझे रुसवा न किया,
जल गया नशेमन मेरा, खाक अरमां हुए,
सब तुने किया मगर मैने चर्चा न किया.
निगाहों मे सुरत तेरी दिल मे याद,
प्यार मे हो गई मेरी जिंदगी बरबाद,
बहुत चाहा मगर किस्मत खराब थी,
दुआ मांगी, न हुआ दिल मेरा शाद.
मुरझा गए फूल खिलकर हसरतों के,
नाकाम हुए सपने हमारी मुहब्बतों के,
दुनियां ने छिन लिया मुझसे यार मेरा,
मुझे याद आ रहे हैं दिन कुरबतों के.
मैने एक पत्थर से दिल लगाया था,
एक बेवफा पर सब कुछ लुटाया था,
उसी ने पिठ में घोंप दिया खंजर,
दोस्त समझ जिसे गले लगाया था.
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खून के आंसू
रुलाता है वही मुझको,
कि जिसकी खातिर खूने दिल बहाया था,
ना मुझ से पूछो मेरे गम की दास्तां,
कि मैने हर कदम पर ज़ख्म खाया है.
ज़िन्दगी इश्क मे तबाह हो गई मेरी,
क्यो ऐसा मनहूस कदम मैने उठाया था,
तडप किसी सूरत दिल की मिटती नही,
उफ! क्यो उस बेवफा को अपना बनाया था.
तुझे कितनी शिद्दत से प्यार किया था,
रातों को जागकर तुम्हारा इन्तज़ार किया था,
लेकिन अब होश आ गया है 'प्यारे' को,
कि एक बेवफा से उम्रभर का इकरार किया था.
तुम्हारी चाहत मे क्या से क्या हो गया,
मैने चाहा था क्या और ये क्या हो गया,
तुमने यूं फेर ली मुझसे आंखें सनम बेवफा,
मानो मुझ से कोई बहुत बडा गुनाह हो गया.
रुस्वाई ज़िंदगी का मुकद्दर हो गयी,
मेरे दिल की देवी पत्थर हो गयी,
जिसे रात दिन पाने के ख्वाब देखे,
वो बेवफा किसी और की हमसफर हो गई.
नज़र जब मिली तो फसाना हो गया,
एक पल मे दिल तेरा दिवाना हो गया,
जब से वह आए हैं मेरी ज़िन्दगी मे,
अंदाज़ 'प्यार' का शायराना हो गया, |